मध्य प्रदेश में किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस का भाजपा सरकार पर हमला, सचिन यादव ने प्रेस ब्रीफिंग में 10 से ज्यादा बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने इसे “नीतिगत विफलता” बताते हुए किसानों के खिलाफ सुनियोजित लापरवाही करार दिया, जबकि सरकार का पक्ष इस ब्रीफिंग में शामिल नहीं था।
कमलनाथ सरकार की योजनाओं का ज़िक्र
प्रेस ब्रीफिंग में पूर्व कृषि मंत्री और कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने सबसे पहले कमलनाथ सरकार के फैसलों का हवाला दिया।
- जय किसान ऋण मुक्ति योजना के तहत 2 लाख तक के फसल ऋण माफ करने का दावा दोहराया गया।
- 10 HP तक कृषि पंपों के लिए आधे बिजली बिल, प्याज किसानों के लिए मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना, नकली खाद–बीज के खिलाफ “शुद्ध के लिए युद्ध” अभियान, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और गौशाला निर्माण जैसी योजनाओं को किसान हितैषी कदम के तौर पर गिनाया गया।
भाजपा सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली सप्लाई, सोयाबीन की MSP पर नियमित सरकारी खरीदी और गेहूं-धान के लिए क्रमशः ₹2700 व ₹3100 प्रति क्विंटल का आश्वासन दिया था, लेकिन इन वादों पर अमल नहीं हुआ।
- ब्रीफिंग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे निरंतर बिजली नहीं मिल रही और अघोषित कटौती जारी है।
- 2025 में सोयाबीन की सरकारी खरीदी बंद करने और भावांतर जैसी योजनाओं के जरिए किसानों को पूरा लाभ न मिलने का आरोप लगाया गया।
- गेहूं और धान के लिए घोषित दामों पर खरीदी की “गारंटी नदारद” होने की बात कही गई।
फसलवार शिकायतें: मूंग, मक्का, कपास, प्याज, केला
कांग्रेस ने अलग‑अलग फसलों को लेकर भी मुद्दे उठाए।
- मूंग के मामले में “मूंग में जहर” जैसी बात कहकर खरीदी टालने, बाद में आंदोलन के दबाव में खरीदी शुरू करने और भुगतान में देरी के आरोप लगाए गए।
- मक्का किसानों को MSP से नीचे ₹1000–1200 प्रति क्विंटल दाम मिलने और केंद्र द्वारा यह कहे जाने का जिक्र किया गया कि राज्य सरकार ने मक्का खरीदी का प्रस्ताव ही नहीं भेजा।
- कपास के लिए CCI द्वारा स्लॉट बुकिंग, नियमों और नमी के आधार पर कटौती से किसानों को दिक्कत होने की बात कही गई और आरोप लगाया गया कि 80% किसान औने‑पौने दाम पर कपास बेचने के बाद ही MSP खरीदी शुरू हुई।
- प्याज के मामले में किसानों को “₹2 किलो से भी कम दाम” और ट्रॉली का भाड़ा तक न निकल पाने जैसी स्थिति बताई गई, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार की प्याज प्रोत्साहन योजना का संदर्भ दिया गया।
- बुरहानपुर समेत केले वाले क्षेत्रों के लिए कहा गया कि केले का उचित बाजार भाव नहीं मिल रहा और फसल बीमा में केले को शामिल न करके “नीतिगत अन्याय” किया गया।
खाद, फसल बीमा और मंडी बोर्ड पर सवाल
प्रेस ब्रीफिंग में खाद, बीमा और मंडी व्यवस्था पर भी निशाना साधा गया।
- दावा किया गया कि DAP और अन्य खाद की कमी के बावजूद सरकार ने बयान दिए कि “DAP से जमीन बंजर होगी”, जबकि ज़मीन पर खरीफ और रबी दोनों सीज़न में संकट, लाइन और लाठीचार्ज जैसी स्थितियां बनीं; एक महिला किसान की मौत का भी उल्लेख किया गया।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संदर्भ में कांग्रेस ने कुल प्रीमियम ₹40,000 करोड़, किसानों को वापस हुए ₹30,000 करोड़ और कंपनियों के पास गए ₹10,000 करोड़ को “लाभ का अंतर” बताते हुए, कई जगह बहुत ही कम मुआवजे (शून्य से लेकर कुछ रुपये तक) को “मज़ाक” बताया।
- मंडी बोर्ड पर लगभग ₹1700 करोड़ की लेनदारी, 259 मंडियों में से 150 में सचिव न होने, एक सचिव पर 4–5 मंडियों का प्रभार और औसतन 100 किमी दूरी जैसे प्रशासनिक आंकड़े रखे गए।
- साथ ही आरोप लगाया गया कि ऐसे हालात में भी मंडी बोर्ड से ₹1500 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की तैयारी है, जबकि मंडी अधिनियम में बोर्ड द्वारा इस तरह ऋण लेने की छूट नहीं है; इसे मंडी व्यवस्था को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की साजिश बताया गया।